Delhi Politics: पटना की बैठक में आप नेता ने कहा था कि काले अध्यादेश का उद्देश्य न केवल दिल्ली में एक निर्वाचित सरकार के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना है, बल्कि भारत के लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा भी पैदा करना है।
Delhi Politics की न्यूज़
Delhi News: बिहार के CM नीतीश कुमार की पहल पर भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार के खिलाफ पटना में विपक्षी दलों की बैठक खत्म हो गई, लेकिन इसका असर यह हुआ कि देश की राजधानी दिल्ली में सियासी घमासान पहले से ज्यादा तीखा हो गया है। विपक्षी दलों की पटना बैठक में CM अरविंद केजरीवाल जो चाहते थे वो नहीं हुआ. आप नेता चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी अध्यादेश पर आप का समर्थन करे, लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया। यह जरूर कहा कि इसके लिए सही मंच संसद है। राज्यसभा में बिल आने पर कांग्रेस अपना पक्ष रखेगी। इससे नाराज CM अरविंद केजरीवाल और आप नेताओं ने पटना बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार भी किया.
मैंने कल ही कह दिया था कि @ArvindKejriwal यही करेगे।
हम केजरीवाल की नस नस से वाक़िफ़ है, वो चाहते है उनको प्रधानमंत्री का कैंडिडेट माना जाए।
आर्डिनेंस तो एक बहाना है असल मक़सद कुछ और है। https://t.co/XVq05uMlUJ pic.twitter.com/o170FeASVx
— Harish Khurana (@HarishKhuranna) June 23, 2023
आप के इस रुख के बाद बीजेपी नेताओं को बोलने का मौका मिल गया. मौके का फायदा उठाते हुए अब उन्होंने CM अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बोला है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन खुराना के बेटे और बीजेपी प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा कि मैंने कल ही कहा था कि आप नेता यह काम करेंगे। हम केजरीवाल की नसों से अवगत हैं, वह चाहते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार माना जाए। अध्यादेश सिर्फ एक बहाना है। उनका असली मकसद कुछ और है।
Delhi Politics पर काले अध्यादेश
इसके अलावा हरीश खुराना ने आम आदमी पार्टी की ओर से जारी पटना बयान की कॉपी भी ट्विटर पर सभी के साथ शेयर की। आप के बयान की कॉपी पब्लिक डोमेन में शेयर करने वाले हरीश खुराना ने लिखा कि काले अध्यादेश का मकसद न सिर्फ दिल्ली में चुनी हुई सरकार के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों के लिए भी बड़ा खतरा है। है। यदि इसे चुनौती नहीं दी गई, तो यह खतरनाक प्रवृत्ति अन्य सभी राज्यों में फैल सकती है, जिसके परिणामस्वरूप लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकारों को हड़प लिया जा सकता है। इस काले अध्यादेश को ध्वस्त करना जरूरी है।
कुछ नेता बचा रहे है कुर्सी
उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने पटना में विपक्षी दलों की बैठक के बाद कहा कि विपक्षी खेमे में प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार हैं। किसी की इच्छा अंदर से होती है तो किसी की इच्छा बाहर की होती है। सभी दलों के नेता अपना-अपना एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पटना की बैठक से दो बातें स्पष्ट हैं। एक यह कि पटना की बैठक स्वार्थी राजनीतिक दलों और नेताओं का जमावड़ा है. दूसरा, विपक्षी दलों के नेता पीएम नरेंद्र मोदी का विरोध कर अपनी कुर्सी बचाना चाहते हैं.
कांग्रेस का रुख साफ नहीं
आपको बता दें कि बिहार की राजधानी पटना में समान विचारधारा वाले दलों की बैठक में कुल 15 दल हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें से 12 का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व है. कांग्रेस को छोड़कर राज्यसभा में प्रतिनिधित्व रखने वाले अन्य सभी 11 दलों ने काले अध्यादेश के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपना रुख व्यक्त किया है और घोषणा की है कि वे राज्यसभा में इसका विरोध करेंगे। वहीं, कांग्रेस ने अभी तक अध्यादेश पर अपना रुख सार्वजनिक नहीं किया है। यह अलग बात है कि कांग्रेस की दिल्ली और पंजाब इकाइयों ने ऐलान किया है कि पार्टी को इस मुद्दे पर आप सरकार का समर्थन करना चाहिए।
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